
आर्थर शोपेनहावर जर्मनी के प्रसिद्ध दार्शनिक थे। वे अपने 'नास्तिक निराशावाद' के दर्शन के लिये प्रसिद्ध हैं। उन्होने २५ वर्ष की आयु में अपना शोधपत्र पर्याप्त तर्क के चार मूल प्रस्तुत किया जिसमें इस बात की मीमांसा की गयी थी कि क्या केवल तर्क संसार के गूढ रहस्यों से पर्दा उठा सकता है?